Friday, May 20, 2022
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What is operating System ? ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) एक आवश्यक प्रोग्राम है. जो कम्प्युटर में सबसे पहले Run करता है. यह यूजर एवं कम्प्युटर के बीच संवाद स्थापित करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर से कमांड लेता है. एवं मशीन तक मैसेज पहुँचाता है. Operating System User के निर्देशों को मशीन लैंग्वेज में बदल कर जरुरी निर्देश भेजता है. जिससे मशीन कार्य करता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) हार्डवेयर एवं साॅफ्टवेयर के बीच समन्वय स्थापित करता है. ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्रामों का समूह होता है जो कंप्यूटर (Computer) के समस्त संसाधनों (Parts) से समस्त कार्यों को संचालित (Operate) कराता है. यह एक मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम (Program) होता है

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ऑपरेटिंग सिस्टम ही कंप्यूटर को ओपरेट कराता है यह कंप्यूटर के स्विच ऑन होते ही सबसे पहले Execute होने वाला पहला सॉफ्टवेयर है इसके बिना कंप्यूटर परिचालन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर पर रन होने वाला अतिमहत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है कंप्यूटर सिस्टम के विकास का उदेश्य कंप्यूटर प्रोग्राम को रन कर प्रयोगकर्ता की निर्देशों का पालन करना था. इसके लिए हमेशा समय समय पर अनेकों हार्डवेयर युक्तियो एवं एप्लीकेशन प्रोग्राम का विकास किया जाता है.

What is operating System ? ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है

ऑपरेटिंग सिस्टम, सिस्टम सॉफ्टवेयर का एक मुख्य हिस्सा होता है जिसके बिना कंप्यूटर को चलाना असंम्भव होता है यह सी० पी० यू० (CPU) से आने वाले सिग्नल को कंप्यूटर के विभिन्न भागो तक प्रवाहित कर नियंत्रण करता है यही वह पहला प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर का स्विच ऑन होने पर कंप्यूटर की स्मृति या मैमोरी में लोड होता है

कंप्यूटर पर होने वाले ऑपरेशनो में कुछ ओपरेशंन होते है जो लगभग प्रत्येक प्रोग्राम द्वारा किए जाते थे. जैसे इनपुट आउटपुट युक्तियो पर नियंत्रण (Control) करना किसी प्रोसेस को कोई युक्ति सौपता है इस प्रकार के सामान्य ऑपरेशन तथा इन्हें करने वाले सब प्रोग्रामो जो की सामान्य प्रत्येक एप्लीकेशन के लिए आवश्यक होते है और एक साथ संगठित कर एक सॉफ्टवेयर का रूप दिया गया इसी सॉफ्टवेयर को ऑपरेटिंग सिस्टम कहा जाता है जिसका अर्थ होता है ऑपरेट करने वाला सिस्टम अर्थात संचालन (Operate) करने वाला सिस्टम (System)

ऑपरेटिंग सिस्टम को हम कंप्यूटर का Heart भी कह सकते है ऑपरेटिंग सिस्टम का स्वंयं कोई विशेष कार्य नहीं होता है एक बाॅस की भांति इसका प्रमुख कार्य कंप्यूटर सिस्टम में एसा माहौल बनाना और प्रबन्ध करना होता है जिससे रन हो रहे अन्य प्रोग्राम तथा ऑपरेशन बिना किसी असुविधा के रन हो सके कंप्यूटर संसाधनों का शत प्रतिशत उपयोग कर सके एंव लाभकारी परिणाम दे सके

ऑपरेटिंग सिस्टम की परिभाषा (Definition of Operating System)

ऑपरेटिंग सिस्टम को परिभाषित करना आसान नहीं  है क्योंकि कोई भी एक परिभाषा ऑपरेटिंग सिस्टम को परिभाषित नहीं कर सकता है. या करने के लिए अपर्याप्त होता है सामान्यतः ऑपरेटिंग सिस्टम को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसे प्रोग्रामों का संगठन या ग्रुप होता है जो की साथ में मिलकर कंप्यूटर सिस्टम युक्तियो तथा उस पर चल रहे ऑपरेशन का संचालन एंव नियंत्रण करता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम एक  प्रोग्राम है. जो प्रयोगकर्ता एवं कम्प्यूटर हार्डवेयर के बीच में एक माध्यम की तरह कार्य करता है. जो प्रयोगकर्ता को कंप्यूटर के उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है ऑपरेटिंग सिस्टम को कम्प्यूटर कंट्रोलर, कम्प्यूटर सुपरवाइजर, कम्प्यूटर संसाधनों का वितरण करने वाला कंप्यूटर प्रबन्धन आदि नाम से भी जानते है ऑपरेटिंग सिस्टम को सक्षिप्त में OS भी कहा जाता है

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) का इतिहास

  • पहला कम्प्युटर Z1 1936 – 1938 में बनाया गया था जो बिना ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के था
  • 20 वर्ष के बाद पहला ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) 1956 में बनाया गया था.
  • 1960 में BELL Labs ने Unix नामक ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) बनाना शुरु किया जो मल्टी टास्कींग वाला था
  • 1977 में एप्पल सीरीज DOS 3.3 डिस्क ऑपरेटिंग लेकर आए
  • 1981 में Microsoft Company ने Seattle Company से डाॅस ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) खरीदकर DOS 86 ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) बनाया
  • 1985 में Microsoft Company ने DOS के साथ GUI को जोड़ा

function of operating system

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य (Function of Operating System)

  • प्रोसेसर मैनेजमेन्ट
  • मेमोरी मैनेजमेन्ट
  • डिवाइस मैनेजमेन्ट
  • फाइल मैनेजमेन्ट
  • सिक्युरिटी मैनेजमेन्ट
  • एरर मैनेजमेन्ट
  • जाॅब मैनेजमेन्ट

प्रोसेसर प्रबंधन(Processor Management)

मल्टिप्रोग्रामिंग वातावरण(multiprogramming environment) में, Operating System तय करता है कि प्रोसेसर कब और कितने समय तक मिलेगा . इस फ़ंक्शन को प्रोसेस शेड्यूलिंग(process scheduling) कहा जाता है . एक ऑपरेटिंग सिस्टम Processor Management के लिए निम्नलिखित कार्य करता है –

  • प्रोसेसर के tracks और  process की status का record रखता है. जो प्रोग्राम इस कार्य के लिए responsible के रूप में जाना जाता है उसे  traffic controller कहते है.
  • प्रोसेसर (सीपीयू) को एक process में Allocates करता है
  • Processor को डी-ऑलोकेट करता है जब कोई process जरूरी नहीं रहता है

स्मृति प्रबंधन(Memory Management)

Memory Management प्राथमिक मेमोरी(Primary Memory) या मुख्य मेमोरी के प्रबंधन को संदर्भित करता है. मुख्य स्मृति शब्द(words) या बाइट्स(bytes) की एक बड़ी सरणी(array) होती है जहां प्रत्येक शब्द या बाइट का अपना पता होता है

मुख्य मेमोरी fast storage प्रदान करता है जिसमे सीपीयू (CPU) द्वारा सीधे पहुंचा जा सकता है. Execute होने वाले प्रोग्राम को हमेशा मुख्य मेमोरी में होना चाहिए. एक ऑपरेटिंग Memory Management  के लिए निम्नलिखित कार्य करता है –

  • Primary Memory के data के tracks Record रखना, यानी Primary Memory  के किस हिस्से का उपयोग किया जा रहा  है, किस हिस्से का उपयोग नहीं किया जा रहा  हैं.
  • multiprogramming में, OS तय करता है कि किस process को कितना memory मिलेगा .
  • memory को Allocates करता है जब कोई process ऐसा करने का requests करता है.
  • memory को De-allocates करता है जब एक process को अब इसकी आवश्यकता नहीं है या उसे  terminated कर दिया गया है.

Device or Input/output Management

एक कंप्यूटर आर्किटेक्चर में, CPU और Storage का संयोजन कंप्यूटर का मस्तिष्क है और यह इनपुट और आउटपुट संसाधनों द्वारा प्रबंधित किया जाता है. मनुष्य 1,0 Number के माध्यम से मशीनों के साथ बातचीत करता है

Display, keyboard, printer and mouse 1,0 डिवाइस हैं. इन सभी उपकरणों का प्रबंधन एक सिस्टम के Throughput को प्रभावित करता है. इसलिए, System का इनपुट और आउटपुट प्रबंधन Operating System की जिम्मेदारी है

Storage Management

Storage Management ऑपरेटिंग सिस्टम का एक फ़ंक्शन है. जो डेटा के Memory allocation को संभालता है. System में विभिन्न प्रकार के Memory Device होते हैं. जैसे कि RAM, Hard-Disk और Cache Storage Memory

निर्देश और डेटा को RAM & cache memory में रखा जाता है. जिसे Running Program द्वारा संदर्भित किया जाता है. हालांकि, बिजली की कटौती होने पर Data खो जाता है तो Hard disk एक Permanent storage device है. जिसमें Data ऑटोमेटिक Save हो जाता है

डिवाइस प्रबंधन(Device Management)

एक ऑपरेटिंग सिस्टम उनके संबंधित drivers के माध्यम सेdevice communication का प्रबंधन करती है यह device management  के लिए निम्नलिखित activities करता है –

  • सभी डिवाइसों के tracks रखता है इस कार्य के लिए responsible Program के रूप में I/O controller को जाना जाता है .
  • Decides करता है कि कौन-सी process डिवाइस को कब और कितनी समय के लिए मिलती है.
  • डिवाइस को efficient तरीके से Allocates करता है.
  • डिवाइस को De-allocates करता है .

फाइल प्रबंधन(File Management)

आसान नेविगेशन और उपयोग के लिए एक file system को सामान्यतः डायरेक्टरी(directories) में व्यवस्थित किया जाता है इन निर्देशिका में फ़ाइलें और other directions हो सकती हैं

file management न के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम निम्न activities करता है –

  • सूचना, स्थान, uses, status आदि का track रखता है. collective facilities अक्सर फ़ाइल सिस्टम के रूप में जाने जाते हैं
  • तय करता है कि resources कौन पहले लेगा.
  • resources को Allocates करता है
  • resources को De-allocates करता है

 

Component of operating system

ऑपरेटिंग सिस्टम के अवयव (Component of Operating System)

सेल (Shell)

शैल भाग एक ओर से कर्नल तथा दूसरी ओर से प्रयोगकर्ता से घिरा रहता है शैल ऐसे रूटीन होते है जो की बाह्म कमांड (External Command ) को रन करते है

आंतरिक कमांड (Internal Command ) एसी कमांड होती है जो की RAM में ही

(कंप्यूटर बंद हो हाने के बाद ROM में) रहती है ये कमांड आवश्यक कमांड होती है जिन्हे ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर चालू होते ही RAM लोड कर देता है

बाह्म कमांड (External Command ) एसी कमांड होती है जो व्दितीय स्टोरेज युक्ति (हार्ड, डिस्क, फ्लापी, टेप,आदि ) पर स्टोर रहती है जब इन्हें रन करने की जरुरत होती है तो ऑपरेटिंग सिस्टम इन्हें RAM में लोड कर देता है

शैल में सभी सर्विस तथा कंट्रोल प्रोग्राम रहते है इसमे कम्पाइलर, इन्टरप्रेंटर, एडिटर, डिबग प्रोग्राम, I/O ड्रावर प्रोग्राम डायग्नोस्टिक टेस्ट के प्रोग्राम आदि रहते है

करनेल (Kernel)

ऑपरेटिंग सिस्टम की कमान इसी भाग के हाथ में रहती है कर्नल में बूटिंग लोडर तथा कुछ ऐसे रूटीन प्रोग्राम होते है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को रन करने तथा सिस्टम को चलाने के लिए आवश्यक आंतरिक कमांड

(जिन्हें ऑपरेटिंग सिस्टम स्वंम रन करता है) रन करने का कार्य करते है अतः यह अतिमहत्वपूर्ण भाग है कर्नल साधारणतः ROM में रहता है और कंप्यूटर चालू होते ही यह RAM में आ जाता है एंव कंप्यूटर जब तक चालू नियंत्रण जैसे कार्य इसी भाग द्वारा किए जाते है

Operating Systems कंप्यूटर के हार्डवेयर संसाधनों को नियंत्रित करता है. Kernel and Shell ऑपरेटिंग सिस्टम के हिस्से हैं. जो आवश्यक संचालन करते हैं. जब कोई उपयोगकर्ता किसी भी operation को करने के लिए Command देता है. तो अनुरोध Shell भाग में जाता है. जिसे दुभाषिया के रूप में भी जाना जाता है

Shell भाग तब मानव प्रोग्राम को machine code में अनुवादित करता है और फिर अनुरोध को Kernel भाग में स्थानांतरित करता है. जब Kernel, Shell से अनुरोध प्राप्त करता है. तो यह अनुरोध को संसाधित करता है. Kernel को Operating Systems के दिल के रूप में भी जाना जाता है

Shell

Shell सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा है. जिसे उपयोगकर्ता और Kernel के बीच रखा जाता है और यह Kernel की सेवाएं प्रदान करता है. Shell इस प्रकार उपयोगकर्ता से Commend को Machine Code में बदलने के लिए एक दुभाषिया के रूप में कार्य करता है. विभिन्न प्रकार के Operating Systems में मौजूद shells दो प्रकार के होते हैं- Command Line के shells & Graphical shells

Command Line के shells एक Command-line interface प्रदान करते हैं. जबकि Graphical shells एक Graphical user interface प्रदान करते हैं. हालांकि दोनों Shells operation करते हैं. graphical user interfaces के Shells, Command Line interface के Shells की तुलना में धीमा Work करते हैं

Types of shells

  • POSIX shell
  • Bourne shell
  • Korn shell
  • C shell

Kernel

Kernel एक सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा है. यह Shell और Hardware के बीच एक पुल की तरह है. यह प्रोग्राम चलाने और Computer के हार्डवेयर तक सुरक्षित पहुंच प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है. Kernel का उपयोग Scheduling के लिए किया जाता है. अर्थात यह सभी Processing के लिए एक Time Table बनाए रखता है

Types of Kernels

  • Exokernels
  • Hybrid kernels
  • Monolithic kernel
  • Microkernels

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (Types of Operating System)

  • Batch OS
  • Distributed OS
  • Multitasking OS
  • Network OS
  • Real-OS
  • Single User Operating System – सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम
  • Multi User Operating System – मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम

इन्हें भी पढ़े – Easy Small Business Ideas in Hindi

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch operating system)

बैच ऑपरेटिंग सिस्टम के users सीधे कंप्यूटर से interact नहीं करते हैं प्रत्येक users अपनी job को पंच कार्ड( punch cards) जैसे एक ऑफ-लाइन(off-line) डिवाइस पर तैयार करता है और इसे कंप्यूटर ऑपरेटर के पास भेजता है. processing को गति देने के लिए, similar जरूरतों के batch मिलकर काम किया जाता है और एक group के रूप में चला जाता है. प्रोग्रामर ऑपरेटर के साथ अपने programs छोड़ देते हैं तो बैचों में समान आवश्यकताओं वाले programs को चलाते हैं.

डिस्ट्रीब्यूट ऑपरेटिंग सिस्टम(Distributed operating System)

कई सारे  real-time applicationऔर कई सारे  users को एकसाथ सेवा देने के लिए डिस्ट्रीब्यूट ऑपरेटिंग सिस्टम central processors का उपयोग करते हैं. डाटा प्रोसेसिंग जॉब्स को प्रोसेसर के अनुसार distribute किया जाता है.

प्रोसेसर विभिन्न संचार लाइनों (जैसे उच्च गति वाले बसों या टेलीफोन लाइनों) के माध्यम से एक दूसरे के साथ संवाद करते हैं. इन्हें loosely coupled systems या Distributed systems के रूप में संदर्भित(referred) किया जाता है. Distributed systems के प्रोसेसर का  आकार और फ़ंक्शन में भिन्न हो सकते हैं. इन प्रोसेसरों को sites, nodes, computers, और इसी तरह के अन्य नामो से जाना जाता  है.

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम(Time-sharing operating systems)

टाइम-शेयरिंग एक ऐसी तकनीक है जो एक ही समय में किसी विशेष कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग करने के लिए कई टर्मिनलों पर स्थित कई लोगों को enables  है. टाइम-शेयरिंग या मल्टीटास्किंग मल्टीप्रोग्राफिकिंग का एक logical विस्तार है. प्रोसेसर का समय, जिसे कई users के साथ साझा किया जाता है, को Time-sharing कहा जाता है.

Multi programmed Batch Systems और टाइम-शेयरिंग सिस्टम के बीच मुख्य अंतर यह है कि Multi programmed Batch Systems के मामले में, प्रोसेसर का उद्देश्य उपयोग को अधिकतम करना है, जबकि टाइम-शेयरिंग सिस्टम में इसका उद्देश्य response समय कम करना है.

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम(Network operating System)

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम एक सर्वर पर चलता है और सर्वर को डेटा, users, समूह, सुरक्षा, एप्लिकेशन और अन्य नेटवर्किंग फ़ंक्शंस प्रबंधित करने की क्षमता प्रदान करता है. नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम का प्राथमिक उद्देश्य एक नेटवर्क, आमतौर पर एक local area network (LAN), एक निजी नेटवर्क(private network) या अन्य नेटवर्क में कई कंप्यूटरों के बीच फ़ाइल साझा(File sharing) और प्रिंटर का उपयोग करने की अनुमति देना है

नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरणों में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज सर्वर 2003, माइक्रोसॉफ्ट विंडोज सर्वर 2008, यूनिक्स, लिनक्स, मैक ओएस एक्स(Mac OS X), नोवेल नेटवेयर(Novell NetWare) और बीएसडी(BSD) शामिल हैं.

रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम(Real Time operating System)

एक real-time system को एक डाटा प्रोसेसिंग सिस्टम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें इनपुट की प्रक्रिया और जवाब देने के लिए आवश्यक समय अंतराल इतनी छोटी होती है कि यह environment. को नियंत्रित कर लेता  है. time system द्वारा उठाए गए एक इनपुट और आवश्यक update जानकारी के समय अन्तराल को display पर response time कहा जाता है . इसलिए इस पद्धति में online processing की तुलना में response time बहुत कम है.

रीयल-टाइम सिस्टम का उपयोग वहां किया जाता है जहाँ  प्रोसेसर के operation पर कठोर समय(rigid time) की आवश्यकता होती है . एक रीयल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम में अच्छी तरह से परिभाषित, निश्चित समय की कमी होनी चाहिए, अन्यथा सिस्टम विफल हो जाएगा. उदाहरण के लिए, वैज्ञानिक प्रयोग, चिकित्सा इमेजिंग सिस्टम(medical imaging systems), औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली, हथियार प्रणाली, रोबोट, हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली आदि

Single User Operating System – सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है एवं कंप्यूटर संसाधनों का प्रयोग कर सकता है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम का उदाहरण MS DOS ( Disk Operating system) है।

Multi User Operating System – मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा कई व्यक्ति एक कंप्यूटर पर कार्य कर सकते हैं एवं कंप्यूटर के संसाधनों जैसे- प्रिंटर, प्लोटर, आदि का उपयोग कर सकते हैं।

सारांश

दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपरेटिंग सिस्टम क्या है? (What is Operating System in Hindi),Operating System कैसे काम करता है? और ऑपरेटिंग सिस्टम कितने प्रकार के होते है(Types of Operating System In Hindi) आदि सवालो का जवाब देने की कोशिश की है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे Like और share जरुर करने का कस्ट करेंगे, अगर आपका कोई सुझाव और सवाल हो तो नीचे comment करना करने की कृपा करेंगे. इस पोस्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद।

Manoj Vermahttp://hinditechsol.com
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